ट्रंप के ऊर्जा सीजफायर से जेलेंस्की की बढ़ी मुश्किलें? ब्रिटेन-कनाडा साथ आए, लेकिन पुतिन की चुप्पी ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली (ज़ीशान हैदर): रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को रोकने की कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित ऊर्जा सीजफायर ने नई कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। इस पहल को ब्रिटेन और कनाडा का समर्थन मिल गया है, लेकिन रूस की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सहमति सामने नहीं आई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह समझौता वास्तव में जमीन पर लागू हो पाएगा या फिर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के लिए नई चुनौतियां खड़ी होंगी।

ट्रंप ने किया ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया के जरिए घोषणा की कि रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से सीजफायर लागू हो गया है। ट्रंप ने दावा किया कि दोनों पक्ष इस समझौते पर सहमत हैं। हालांकि, यूक्रेन को भी इस घोषणा की जानकारी अचानक मिली। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन इस पहल का समर्थन करता है, लेकिन रूस को भी आधिकारिक रूप से इसे स्वीकार करना होगा। मॉस्को की ओर से अब तक कोई पुष्टि नहीं होने के कारण इस समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

ब्रिटेन और कनाडा ने किया ट्रंप की पहल का समर्थन

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप से बातचीत के दौरान ऊर्जा सीजफायर का समर्थन किया। उन्होंने रूस से समझौते का पालन करने और ऊर्जा ढांचे व आम नागरिकों पर हमले तुरंत रोकने की अपील की। कार्नी ने यह भी कहा कि कनाडा अमेरिका को तेल और डीजल का निर्यात जारी रखेगा। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि रूस ने हाल के दिनों में यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले तेज किए हैं, जिससे आम नागरिकों को ठंड और अंधेरे की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि रूस हमले रोकता है तो यूक्रेन सीजफायर के लिए तैयार है।

जेलेंस्की का आरोप- बिजली संयंत्रों को बनाया गया निशाना

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस ने रविवार को यूक्रेन के कई बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया। इनमें राजधानी कीव और खारकीव के ऊर्जा संयंत्र भी शामिल हैं। हमलों के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।

जेलेंस्की ने कहा कि पूरे दिन यूक्रेन के आसमान में रूसी शाहेद ड्रोन उड़ते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस वर्ष 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से लगातार यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा है, जिससे बिजली और हीटिंग व्यवस्था प्रभावित हुई है।

रूसी डीजल सौदे पर ट्रंप-जेलेंस्की आमने-सामने

ऊर्जा सीजफायर के बीच रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। ट्रंप ने सीजफायर घोषणा से दो दिन पहले रूसी डीजल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी राहत देने वाले सौदे का ऐलान किया था।

यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने इस फैसले का विरोध किया। जेलेंस्की ने इसे कमजोर नीति बताया, जबकि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी कहा कि यह यूरोप में शांति और स्थिरता स्थापित करने की कोशिशों के विपरीत है।

अमेरिकी सीनेट के सात सदस्यों, जिनमें चार रिपब्लिकन सांसद भी शामिल हैं, ने इस सौदे को अवैध बताया है। पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंताओं के बीच तेल कीमतों में बढ़ोतरी भी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

ट्रंप के बयान से जेलेंस्की पर बढ़ा दबाव

ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि यूक्रेन को ऐसा नया राष्ट्रपति चाहिए जो युद्ध खत्म कर सके। इस बयान के बाद जेलेंस्की पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है।जेलेंस्की ने जवाब देते हुए कहा कि यूक्रेन का नेता कौन होगा, इसका फैसला वहां की जनता करेगी। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने जेलेंस्की और यूक्रेन सरकार को समर्थन जारी रखने की बात कही।

पुतिन की चुप्पी बनी सबसे बड़ा सवाल

ट्रंप की पहल को पश्चिमी देशों का समर्थन मिलने के बावजूद रूस की स्थिति अभी साफ नहीं है। यही वजह है कि ऊर्जा सीजफायर को लेकर सबसे बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मॉस्को इस समझौते को स्वीकार नहीं करता, तब तक यह साफ नहीं होगा कि ऊर्जा ठिकानों पर हमले वास्तव में रुकेंगे या नहीं। ऐसे में आने वाले दिनों में पुतिन का रुख ही तय करेगा कि ट्रंप की यह पहल युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ती है या सिर्फ कूटनीतिक प्रयास बनकर रह जाती है।

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